संधि विच्छेद संधि विच्छेद

UPSSSC लोअर मेन्स के लिए संधि विच्छेद की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए संधि विच्छेद की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।

संधि विच्छेद: माइंडमैपसंधि विच्छेद: माइंडमैप

graph TD A[संधि] --> B[स्वर संधि] A --> C[व्यंजन संधि] A --> D[विसर्ग संधि] B --> B1[दीर्घ] B --> B2[गुण] B --> B3[वृद्धि] B --> B4[यण] B --> B5[अयादि]
graph TD A[संधि] --> B[स्वर संधि] A --> C[व्यंजन संधि] A --> D[विसर्ग संधि] B --> B1[दीर्घ] B --> B2[गुण] B --> B3[वृद्धि] B --> B4[यण] B --> B5[अयादि]

संधि के प्रकार: तुलनात्मक तालिकासंधि के प्रकार: तुलनात्मक तालिका

संधि का प्रकारपरिभाषाउदाहरण
स्वरदो स्वरों का मेलविद्या + आलय = विद्यालय
व्यंजनस्वर/व्यंजन का मेलदिक + अम्बर = दिगम्बर
विसर्गविसर्ग का मेलमनः + रथ = मनोरथ

स्वर संधि: दीर्घ संधिस्वर संधि: दीर्घ संधि

जब दो सवर्ण स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं।जब दो सवर्ण स्वर मिलकर दीर्घ हो जाते हैं।

अ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊअ/आ + अ/आ = आ; इ/ई + इ/ई = ई; उ/ऊ + उ/ऊ = ऊ

उदाहरण: धर्म + अर्थ = धर्मार्थ, कवि + इंद्र = कवींद्र, भानु + उदय = भानूदय।उदाहरण: धर्म + अर्थ = धर्मार्थ, कवि + इंद्र = कवींद्र, भानु + उदय = भानूदय।

गुण संधिगुण संधि

अ/आ के बाद इ/ई हो तो 'ए', उ/ऊ हो तो 'ओ', और ऋ हो तो 'अर' हो जाता है।अ/आ के बाद इ/ई हो तो 'ए', उ/ऊ हो तो 'ओ', और ऋ हो तो 'अर' हो जाता है।

अ + इ = ए, अ + उ = ओ, अ + ऋ = अरअ + इ = ए, अ + उ = ओ, अ + ऋ = अर

उदाहरण: नर + इंद्र = नरेंद्र, महा + उत्सव = महोत्सव, देव + ऋषि = देवर्षि।उदाहरण: नर + इंद्र = नरेंद्र, महा + उत्सव = महोत्सव, देव + ऋषि = देवर्षि।

वृद्धि संधिवृद्धि संधि

अ/आ के बाद ए/ऐ आने पर 'ऐ' तथा ओ/औ आने पर 'औ' हो जाता है।अ/आ के बाद ए/ऐ आने पर 'ऐ' तथा ओ/औ आने पर 'औ' हो जाता है।

अ + ए = ऐ, अ + ओ = औअ + ए = ऐ, अ + ओ = औ

उदाहरण: एक + एक = एकैक, सदा + एव = सदैव, महा + औषध = महौषध।उदाहरण: एक + एक = एकैक, सदा + एव = सदैव, महा + औषध = महौषध।

यण संधियण संधि

इ/ई, उ/ऊ, या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो इ का 'य', उ का 'व' और ऋ का 'र' हो जाता है।इ/ई, उ/ऊ, या ऋ के बाद कोई भिन्न स्वर आए तो इ का 'य', उ का 'व' और ऋ का 'र' हो जाता है।

उदाहरण: अति + अधिक = अत्यधिक, सु + आगत = स्वागत, पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा।उदाहरण: अति + अधिक = अत्यधिक, सु + आगत = स्वागत, पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा।

अयादि संधिअयादि संधि

ए, ऐ, ओ, औ का मेल किसी अन्य स्वर से होने पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाता है।ए, ऐ, ओ, औ का मेल किसी अन्य स्वर से होने पर क्रमशः अय्, आय्, अव्, आव् हो जाता है।

उदाहरण: ने + अन = नयन, गै + अक = गायक, पो + अन = पवन, पौ + अक = पावक।उदाहरण: ने + अन = नयन, गै + अक = गायक, पो + अन = पवन, पौ + अक = पावक।

व्यंजन संधि के मुख्य नियमव्यंजन संधि के मुख्य नियम

वर्ग के पहले वर्ण का तीसरे में परिवर्तन: दिक + गज = दिग्गज, अच + अंत = अजंत।वर्ग के पहले वर्ण का तीसरे में परिवर्तन: दिक + गज = दिग्गज, अच + अंत = अजंत।

वर्ग के पहले वर्ण का पांचवें में: वाक् + मय = वाङ्मय, जगत् + नाथ = जगन्नाथ।वर्ग के पहले वर्ण का पांचवें में: वाक् + मय = वाङ्मय, जगत् + नाथ = जगन्नाथ।

विसर्ग संधि के नियमविसर्ग संधि के नियम

यदि विसर्ग के पहले 'अ' हो और बाद में भी 'अ' या घोष वर्ण हो तो विसर्ग का 'ओ' हो जाता है।यदि विसर्ग के पहले 'अ' हो और बाद में भी 'अ' या घोष वर्ण हो तो विसर्ग का 'ओ' हो जाता है।

उदाहरण: मनः + अनुकूल = मनोनुकूल, निः + छल = निश्चल, दुः + शासन = दुःशासन।उदाहरण: मनः + अनुकूल = मनोनुकूल, निः + छल = निश्चल, दुः + शासन = दुःशासन।

महत्वपूर्ण उदाहरण संग्रहमहत्वपूर्ण उदाहरण संग्रह

सत् + जन = सज्जन, उत् + लास = उल्लास, तत + लीन = तल्लीन, परि + छेद = परिच्छेद, अनु + एषण = अन्वेषण, गुरु + उपदेश = गुरूपदेश।सत् + जन = सज्जन, उत् + लास = उल्लास, तत + लीन = तल्लीन, परि + छेद = परिच्छेद, अनु + एषण = अन्वेषण, गुरु + उपदेश = गुरूपदेश।

संधि पहचानने की ट्रिक्ससंधि पहचानने की ट्रिक्स

1. दीर्घ संधि: शब्द के बीच में आ, ई, ऊ की मात्रा हो। 2. गुण संधि: ए, ओ की मात्रा हो। 3. वृद्धि संधि: ऐ, औ की मात्रा हो। 4. यण संधि: य, व, र से पहले आधा अक्षर हो। 5. अयादि संधि: तीन अक्षर का शब्द और बीच में 'य' या 'व' की ध्वनि।1. दीर्घ संधि: शब्द के बीच में आ, ई, ऊ की मात्रा हो। 2. गुण संधि: ए, ओ की मात्रा हो। 3. वृद्धि संधि: ऐ, औ की मात्रा हो। 4. यण संधि: य, व, र से पहले आधा अक्षर हो। 5. अयादि संधि: तीन अक्षर का शब्द और बीच में 'य' या 'व' की ध्वनि।