UPSSSC लोअर मेन्स के लिए लोकोक्तियां की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए लोकोक्तियां की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| आधारआधार | मुहावरामुहावरा | लोकोक्तिलोकोक्ति |
|---|---|---|
| पूर्णतापूर्णता | वाक्यांशवाक्यांश | पूर्ण वाक्यपूर्ण वाक्य |
| प्रयोगप्रयोग | वाक्य के भीतरवाक्य के भीतर | स्वतंत्रस्वतंत्र |
| अर्थअर्थ | लाक्षणिकलाक्षणिक | आनुभविक/व्यावहारिकआनुभविक/व्यावहारिक |
'लोकोक्ति' दो शब्दों से मिलकर बना है- 'लोक' और 'उक्ति'। इसका अर्थ है लोक में प्रचलित कथन। लोकोक्तियाँ समाज के लंबे अनुभव का निचोड़ होती हैं।'लोकोक्ति' दो शब्दों से मिलकर बना है- 'लोक' और 'उक्ति'। इसका अर्थ है लोक में प्रचलित कथन। लोकोक्तियाँ समाज के लंबे अनुभव का निचोड़ होती हैं।
1. अधजल गगरी छलकत जाय - ओछा व्यक्ति अधिक प्रदर्शन करता है।
2. अपनी डफली अपना राग - सबका अलग-अलग मत होना।
3. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत - समय निकल जाने पर पछतावा व्यर्थ है।
4. आम के आम गुठलियों के दाम - दोहरा लाभ होना।
5. आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास - किसी विशेष कार्य को छोड़कर अन्य कार्य में लग जाना।1. अधजल गगरी छलकत जाय - ओछा व्यक्ति अधिक प्रदर्शन करता है।
2. अपनी डफली अपना राग - सबका अलग-अलग मत होना।
3. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत - समय निकल जाने पर पछतावा व्यर्थ है।
4. आम के आम गुठलियों के दाम - दोहरा लाभ होना।
5. आए थे हरि भजन को ओटन लगे कपास - किसी विशेष कार्य को छोड़कर अन्य कार्य में लग जाना।
6. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे - अपराधी द्वारा उल्टा आरोप लगाना।
7. ऊँची दुकान फीका पकवान - बाहर से दिखावा अधिक पर गुण कम।
8. एक पंथ दो काज - एक कार्य से दोहरा लाभ।
9. ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर - कठिनाई में पड़ने पर संघर्ष से पीछे नहीं हटना।
10. घर का भेदी लंका ढाए - आपसी फूट से विनाश होता है।6. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे - अपराधी द्वारा उल्टा आरोप लगाना।
7. ऊँची दुकान फीका पकवान - बाहर से दिखावा अधिक पर गुण कम।
8. एक पंथ दो काज - एक कार्य से दोहरा लाभ।
9. ओखली में सिर दिया तो मूसलों से क्या डर - कठिनाई में पड़ने पर संघर्ष से पीछे नहीं हटना।
10. घर का भेदी लंका ढाए - आपसी फूट से विनाश होता है।
11. चोर की दाढ़ी में तिनका - अपराधी सदा डरा रहता है।
12. जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजै - समय के अनुसार कार्य करना।
13. जाको राखे साइयां मार सके न कोय - भगवान जिसे बचाए उसे कोई नहीं मार सकता।
14. ढाक के तीन पात - सदा एक जैसी स्थिति।
15. थोथा चना बाजे घना - मूर्ख व्यक्ति अधिक बोलता है।11. चोर की दाढ़ी में तिनका - अपराधी सदा डरा रहता है।
12. जैसी बहे बयार पीठ तब तैसी दीजै - समय के अनुसार कार्य करना।
13. जाको राखे साइयां मार सके न कोय - भगवान जिसे बचाए उसे कोई नहीं मार सकता।
14. ढाक के तीन पात - सदा एक जैसी स्थिति।
15. थोथा चना बाजे घना - मूर्ख व्यक्ति अधिक बोलता है।
16. दूर के ढोल सुहावने लगते हैं - दूर की वस्तु अच्छी लगती है।
17. न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी - असंभव शर्त रखना।
18. नाच न जाने आँगन टेढ़ा - अपनी कमी न मानकर दोष दूसरों पर डालना।
19. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद - मूर्ख व्यक्ति अच्छी वस्तु की कद्र नहीं करता।
20. बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी - कब तक संकट से बचा जा सकता है।16. दूर के ढोल सुहावने लगते हैं - दूर की वस्तु अच्छी लगती है।
17. न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी - असंभव शर्त रखना।
18. नाच न जाने आँगन टेढ़ा - अपनी कमी न मानकर दोष दूसरों पर डालना।
19. बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद - मूर्ख व्यक्ति अच्छी वस्तु की कद्र नहीं करता।
20. बकरे की माँ कब तक खैर मनाएगी - कब तक संकट से बचा जा सकता है।
21. बिल्ली के भागों छींका टूटा - अचानक लाभ होना।
22. भैंस के आगे बीन बजाए भैंस खड़ी पगुराए - मूर्ख को उपदेश देना व्यर्थ है।
23. मन चंगा तो कठौती में गंगा - मन शुद्ध हो तो घर में ही तीर्थ का फल मिलता है।
24. मुंह में राम बगल में छुरी - ऊपर से मित्र अंदर से शत्रु।
25. रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई - नुकसान होने पर भी अहंकार न जाना।21. बिल्ली के भागों छींका टूटा - अचानक लाभ होना।
22. भैंस के आगे बीन बजाए भैंस खड़ी पगुराए - मूर्ख को उपदेश देना व्यर्थ है।
23. मन चंगा तो कठौती में गंगा - मन शुद्ध हो तो घर में ही तीर्थ का फल मिलता है।
24. मुंह में राम बगल में छुरी - ऊपर से मित्र अंदर से शत्रु।
25. रस्सी जल गई पर ऐंठन न गई - नुकसान होने पर भी अहंकार न जाना।
26. सांच को आंच नहीं - सत्य को किसी का डर नहीं होता।
27. हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और - कथनी और करनी में अंतर।
28. काला अक्षर भैंस बराबर - बिल्कुल अनपढ़।
29. अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है - अपने क्षेत्र में सब बलवान होते हैं।
30. अधजल गगरी छलकत जाए - कम ज्ञान वाला अधिक प्रदर्शन करता है।26. सांच को आंच नहीं - सत्य को किसी का डर नहीं होता।
27. हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और - कथनी और करनी में अंतर।
28. काला अक्षर भैंस बराबर - बिल्कुल अनपढ़।
29. अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है - अपने क्षेत्र में सब बलवान होते हैं।
30. अधजल गगरी छलकत जाए - कम ज्ञान वाला अधिक प्रदर्शन करता है।