मात्रा-पहचान और प्रयोग मात्रा-पहचान और प्रयोग

UPSSSC लोअर मेन्स के लिए मात्रा-पहचान और प्रयोग की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए मात्रा-पहचान और प्रयोग की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।

माइंडमैप: मात्रा-पहचान और प्रयोगमाइंडमैप: मात्रा-पहचान और प्रयोग

mindmap root((मात्रा-ज्ञान)) स्वर-मात्राएँ ह्रस्व स्वर दीर्घ स्वर प्रयोग के नियम व्यंजन के साथ 'र' का प्रयोग विशेष चिह्न अनुस्वार अनुनासिक विसर्ग
mindmap root((मात्रा-ज्ञान)) स्वर-मात्राएँ ह्रस्व स्वर दीर्घ स्वर प्रयोग के नियम व्यंजन के साथ 'र' का प्रयोग विशेष चिह्न अनुस्वार अनुनासिक विसर्ग

मात्रा-तालिका एवं त्वरित पुनरीक्षणमात्रा-तालिका एवं त्वरित पुनरीक्षण

स्वरमात्राव्यंजन के साथ उदाहरण
-
का
िकि
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मात्रा की परिभाषा

मात्रा की परिभाषा

व्यंजन के साथ स्वर के जुड़े हुए रूप को 'मात्रा' कहते हैं।व्यंजन के साथ स्वर के जुड़े हुए रूप को 'मात्रा' कहते हैं।

अ स्वर की कोई मात्रा नहीं होती, यह सभी व्यंजनों में निहित रहता है।अ स्वर की कोई मात्रा नहीं होती, यह सभी व्यंजनों में निहित रहता है।

ह्रस्व और दीर्घ मात्राएँ

ह्रस्व और दीर्घ मात्राएँ

ह्रस्व (लघु) मात्राएँ: अ, इ, उ, ऋ। इनका उच्चारण कम समय में होता है।ह्रस्व (लघु) मात्राएँ: अ, इ, उ, ऋ। इनका उच्चारण कम समय में होता है।

दीर्घ (गुरु) मात्राएँ: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। इनका उच्चारण ह्रस्व से दोगुना समय लेता है।दीर्घ (गुरु) मात्राएँ: आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ। इनका उच्चारण ह्रस्व से दोगुना समय लेता है।

'र' के साथ उ/ऊ की मात्रा का विशेष प्रयोग

'र' के साथ उ/ऊ की मात्रा का विशेष प्रयोग

'र' व्यंजन में उ और ऊ की मात्रा नीचे नहीं, बल्कि बीच में लगती है।'र' व्यंजन में उ और ऊ की मात्रा नीचे नहीं, बल्कि बीच में लगती है।

र + उ = रु (जैसे: रुपया, रुचि), र + ऊ = रू (जैसे: रूप, रूठना)र + उ = रु (जैसे: रुपया, रुचि), र + ऊ = रू (जैसे: रूप, रूठना)

अनुस्वार और अनुनासिक (चंद्रबिंदु)

अनुस्वार और अनुनासिक (चंद्रबिंदु)

अनुस्वार (ं): इसका उच्चारण नाक से होता है (जैसे: हंस, अंग)।अनुस्वार (ं): इसका उच्चारण नाक से होता है (जैसे: हंस, अंग)।

अनुनासिक (ँ): इसे चंद्रबिंदु कहते हैं, इसका उच्चारण नाक और मुख दोनों से होता है (जैसे: आँख, गाँव)।अनुनासिक (ँ): इसे चंद्रबिंदु कहते हैं, इसका उच्चारण नाक और मुख दोनों से होता है (जैसे: आँख, गाँव)।

विसर्ग (:) का प्रयोग

विसर्ग (:) का प्रयोग

विसर्ग का उच्चारण आधे 'ह' की तरह होता है। यह मुख्य रूप से तत्सम शब्दों में प्रयुक्त होता है।विसर्ग का उच्चारण आधे 'ह' की तरह होता है। यह मुख्य रूप से तत्सम शब्दों में प्रयुक्त होता है।

उदाहरण: प्रातः, स्वतः, दुःख, निःसंकोच।उदाहरण: प्रातः, स्वतः, दुःख, निःसंकोच।

हलंत (्) का महत्व

हलंत (्) का महत्व

जब किसी व्यंजन को स्वर रहित लिखना हो, तो उसके नीचे हलंत (्) लगाया जाता है।जब किसी व्यंजन को स्वर रहित लिखना हो, तो उसके नीचे हलंत (्) लगाया जाता है।

उदाहरण: क्, ख्, ग्, च् (जैसे: विद्या, मक्का, चिह्न)।उदाहरण: क्, ख्, ग्, च् (जैसे: विद्या, मक्का, चिह्न)।

संयुक्त व्यंजन और मात्रा

संयुक्त व्यंजन और मात्रा

क्ष, त्र, ज्ञ, श्र संयुक्त व्यंजन हैं। इनमें मात्रा लगाने का नियम सामान्य व्यंजनों जैसा ही है।क्ष, त्र, ज्ञ, श्र संयुक्त व्यंजन हैं। इनमें मात्रा लगाने का नियम सामान्य व्यंजनों जैसा ही है।

उदाहरण: क्षा (क्षात्र), त्री (त्रिशूल), ज्ञा (ज्ञान), श्रु (श्रुति)।उदाहरण: क्षा (क्षात्र), त्री (त्रिशूल), ज्ञा (ज्ञान), श्रु (श्रुति)।

मात्रा-पहचान के 50 उदाहरण (अभ्यास)

मात्रा-पहचान के 50 उदाहरण (अभ्यास)

1. कमल (अ), 2. माला (आ), 3. किताब (ि), 4. नदी (ी), 5. पुत्र (ु), 6. फूल (ू), 7. केला (े), 8. पैसा (ै), 9. मोर (ो), 10. कौआ (ौ), 11. चंद्र (ं), 12. आँख (ँ), 13. अतः (:) ... (इसी प्रकार अन्य शब्द अभ्यास करें)।1. कमल (अ), 2. माला (आ), 3. किताब (ि), 4. नदी (ी), 5. पुत्र (ु), 6. फूल (ू), 7. केला (े), 8. पैसा (ै), 9. मोर (ो), 10. कौआ (ौ), 11. चंद्र (ं), 12. आँख (ँ), 13. अतः (:) ... (इसी प्रकार अन्य शब्द अभ्यास करें)।

परीक्षा हेतु टिप्स और ट्रिक्स

परीक्षा हेतु टिप्स और ट्रिक्स

1. 'र' वाले शब्दों में भ्रमित न हों: 'रु' (छोटा उ) और 'रू' (बड़ा ऊ) का अंतर ध्यान रखें।1. 'र' वाले शब्दों में भ्रमित न हों: 'रु' (छोटा उ) और 'रू' (बड़ा ऊ) का अंतर ध्यान रखें।

2. अनुनासिक और अनुस्वार में भेद पहचानें: जहाँ उच्चारण केवल नाक से हो वहाँ अनुस्वार, जहाँ मुख और नाक दोनों से हो वहाँ अनुनासिक।2. अनुनासिक और अनुस्वार में भेद पहचानें: जहाँ उच्चारण केवल नाक से हो वहाँ अनुस्वार, जहाँ मुख और नाक दोनों से हो वहाँ अनुनासिक।

3. शब्द शुद्धि में मात्राओं का ध्यान रखें: 'कवयित्री', 'आशीर्वाद', 'उज्ज्वल' जैसे शब्दों में मात्राओं का विशेष अभ्यास करें।3. शब्द शुद्धि में मात्राओं का ध्यान रखें: 'कवयित्री', 'आशीर्वाद', 'उज्ज्वल' जैसे शब्दों में मात्राओं का विशेष अभ्यास करें।