परसर्ग परसर्ग

UPSSSC लोअर मेन्स के लिए परसर्ग की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए परसर्ग की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।

परसर्ग (कारक चिह्न) का माइंडमैपपरसर्ग (कारक चिह्न) का माइंडमैप

mindmap root((परसर्ग)) परिभाषा भेद उपयोगिता विभक्ति नियम
mindmap root((परसर्ग)) परिभाषा भेद उपयोगिता विभक्ति नियम

कारक और उनके परसर्ग (विभक्ति)कारक और उनके परसर्ग (विभक्ति)

कारकपरसर्ग (चिह्न)
कर्ताने
कर्मको
करणसे, के द्वारा
संप्रदानको, के लिए
अपादानसे (अलग होने पर)
संबंधका, की, के, रा, री, रे
अधिकरणमें, पर
संबोधनहे, अरे, ओ

परसर्ग की परिभाषापरसर्ग की परिभाषा

संज्ञा या सर्वनाम के बाद जो शब्दांश जुड़कर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों (मुख्यतः क्रिया) से जोड़ते हैं, उन्हें परसर्ग या कारक चिह्न कहते हैं।संज्ञा या सर्वनाम के बाद जो शब्दांश जुड़कर उसका संबंध वाक्य के अन्य शब्दों (मुख्यतः क्रिया) से जोड़ते हैं, उन्हें परसर्ग या कारक चिह्न कहते हैं।

परसर्ग = बाद में लगने वाला (पर + सर्ग)परसर्ग = बाद में लगने वाला (पर + सर्ग)

कर्ता कारक के नियम

कर्ता कारक के नियम

कर्ता कारक का परसर्ग 'ने' है। यह केवल सकर्मक क्रियाओं में भूतकाल में प्रयुक्त होता है।कर्ता कारक का परसर्ग 'ने' है। यह केवल सकर्मक क्रियाओं में भूतकाल में प्रयुक्त होता है।

  • राम ने खाना खाया।राम ने खाना खाया।
  • सीता ने पत्र लिखा।सीता ने पत्र लिखा।

कर्म कारक और परसर्ग 'को'

कर्म कारक और परसर्ग 'को'

जहाँ क्रिया का फल कर्म पर पड़े। सजीव कर्म के साथ 'को' का प्रयोग अनिवार्य है।जहाँ क्रिया का फल कर्म पर पड़े। सजीव कर्म के साथ 'को' का प्रयोग अनिवार्य है।

  • श्याम ने कुत्ते को मारा।श्याम ने कुत्ते को मारा।
  • मैंने मोहन को बुलाया।मैंने मोहन को बुलाया।

करण और अपादान में 'से' का अंतर

करण और अपादान में 'से' का अंतर

करण कारक 'से' का प्रयोग 'साधन' के अर्थ में होता है, जबकि अपादान 'से' का प्रयोग 'अलगाव' के अर्थ में होता है।करण कारक 'से' का प्रयोग 'साधन' के अर्थ में होता है, जबकि अपादान 'से' का प्रयोग 'अलगाव' के अर्थ में होता है।

करण: कलम से लिखना (साधन)। अपादान: पेड़ से पत्ता गिरा (अलगाव)।करण: कलम से लिखना (साधन)। अपादान: पेड़ से पत्ता गिरा (अलगाव)।

संप्रदान कारक (के लिए)

संप्रदान कारक (के लिए)

जब किसी के लिए कुछ किया जाए या कुछ दिया जाए।जब किसी के लिए कुछ किया जाए या कुछ दिया जाए।

  • माँ ने बच्चे के लिए खिलौने खरीदे।माँ ने बच्चे के लिए खिलौने खरीदे।
  • गरीबों को दान दो।गरीबों को दान दो।

संबंध कारक (का, की, के)

संबंध कारक (का, की, के)

यह संज्ञा का संज्ञा से संबंध बताता है। इसका रूप लिंग और वचन के अनुसार बदलता है।यह संज्ञा का संज्ञा से संबंध बताता है। इसका रूप लिंग और वचन के अनुसार बदलता है।

  • राम का घर।राम का घर।
  • सीता की किताब।सीता की किताब।
  • मेरे भाई।मेरे भाई।

अधिकरण कारक (में, पर)

अधिकरण कारक (में, पर)

क्रिया के आधार को सूचित करता है।क्रिया के आधार को सूचित करता है।

  • मेज पर किताब है।मेज पर किताब है।
  • पानी में मछली है।पानी में मछली है।

परसर्ग संबंधी महत्वपूर्ण नियम

परसर्ग संबंधी महत्वपूर्ण नियम

1. यदि सर्वनाम के साथ परसर्ग जुड़े, तो सर्वनाम विकृत हो जाता है (जैसे: मैं + को = मुझे)।1. यदि सर्वनाम के साथ परसर्ग जुड़े, तो सर्वनाम विकृत हो जाता है (जैसे: मैं + को = मुझे)।

2. संबोधन कारक में परसर्ग संज्ञा से पहले आते हैं (जैसे: हे प्रभु)।2. संबोधन कारक में परसर्ग संज्ञा से पहले आते हैं (जैसे: हे प्रभु)।

परीक्षा उपयोगी टिप्स और ट्रिक्स

परीक्षा उपयोगी टिप्स और ट्रिक्स

1. 'ने' का प्रयोग केवल सकर्मक भूतकाल में होता है, यह ध्यान रखें।1. 'ने' का प्रयोग केवल सकर्मक भूतकाल में होता है, यह ध्यान रखें।

2. तुलना, डर, और दूरी (दूरी का भाव) हमेशा 'अपादान' कारक (से) होगा।2. तुलना, डर, और दूरी (दूरी का भाव) हमेशा 'अपादान' कारक (से) होगा।

3. यदि वाक्य में 'को' के स्थान पर 'के लिए' रखकर अर्थ स्पष्ट हो, तो वह संप्रदान है।3. यदि वाक्य में 'को' के स्थान पर 'के लिए' रखकर अर्थ स्पष्ट हो, तो वह संप्रदान है।